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कृष्ण जन्म की कथा | भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रहस्य

क्या आपने कभी सोचा है कि एक कारागार में जन्मे बालक ने कैसे पूरे विश्व को प्रेम और धर्म का पाठ पढ़ाया?

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश का दिव्य संकेत था। जब-जब धरती पर पाप और अत्याचार बढ़ता है, तब-तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की रक्षा करते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इसी दिव्य अवतार की याद में मनाया जाता है।

आइए जानते हैं भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़े उन अद्भुत रहस्यों को जो आज भी करोड़ों भक्तों के मन में आस्था और विश्वास जगाते हैं।


द्वापर युग का अंधकारमय समय: जब मथुरा में छाया था भय का साम्राज्य

द्वापर युग के अंतिम चरण में मथुरा नगरी पर राजा कंस का शासन था। कंस एक क्रूर और अत्याचारी राजा था जिसका नाम सुनते ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते थे। वह अपनी प्रजा पर अत्याचार करता था और किसी भी विरोध को निर्दयता से कुचल देता था।

कंस की एक बहन थी देवकी, जिससे वह बेहद स्नेह करता था। देवकी का विवाह यदुवंशी राजकुमार वासुदेव से हुआ। विवाह के समय कंस स्वयं रथ हांक कर अपनी बहन को उसके ससुराल ले जा रहा था। पूरी मथुरा नगरी उत्सव में डूबी हुई थी।

वह आकाशवाणी जिसने बदल दिया कंस का हृदय

लेकिन अचानक आकाश से एक दिव्य वाणी गूंजी – “अरे मूर्ख कंस! जिस बहन के लिए तू इतना प्रेम प्रदर्शित कर रहा है, उसी की आठवीं संतान तेरे मृत्यु का कारण बनेगी।”

यह सुनते ही कंस का चेहरा फीका पड़ गया। उसने तुरंत अपनी तलवार निकाली और देवकी के बाल पकड़कर उसे मारने के लिए तैयार हो गया। वासुदेव ने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए कंस से कहा कि अभी तो कोई संतान है ही नहीं, और आठवीं संतान तो कई वर्षों बाद होगी।

वासुदेव ने कंस से वादा किया कि वे देवकी की प्रत्येक संतान को कंस के सामने प्रस्तुत करेंगे। इस वचन के बदले कंस ने देवकी को जीवित छोड़ दिया, लेकिन दोनों को कारागार में बंद कर दिया।

कारागार में सात संतानों का बलिदान: पाप का चरम बिंदु

मथुरा के राजमहल के सबसे निचले तलघर में बने उस कारागार में जहां सूर्य की एक किरण भी नहीं पहुंचती थी, देवकी और वासुदेव को रखा गया। जब देवकी की पहली संतान हुई, तो वासुदेव उसे कंस के पास ले गए। निर्दयी कंस ने उस मासूम शिशु को पत्थर पर पटककर मार डाला।

इसी प्रकार एक-एक करके देवकी की सात संतानों को कंस ने मार डाला। हर बार देवकी के हृदय में असहनीय पीड़ा होती, लेकिन वे विवश थीं।

नारद मुनि का दिव्य संदेश

इसी पीड़ा के समय नारद मुनि प्रकट हुए और देवकी-वासुदेव को बताया कि ये सातों बालक पूर्व जन्म में मरीचि ऋषि के पुत्र थे, जिन्होंने ब्रह्मा जी का उपहास किया था। उनके श्राप के कारण उन्हें कंस के हाथों मृत्यु प्राप्त होनी थी। यह सब एक दिव्य योजना का हिस्सा था ताकि कंस का पाप अपने चरम पर पहुंचे और भगवान के अवतार का मार्ग प्रशस्त हो सके।


श्रीकृष्ण का दिव्य जन्म: जब कारागार में उतरे साक्षात नारायण

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, आधी रात्रि में, रोहिणी नक्षत्र के समय वह पवित्र क्षण आया जब धरती पर अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु ने अवतार लेने का निश्चय किया।

चार भुजाओं वाले विष्णु रूप में दर्शन

कारागार में अचानक एक अलौकिक प्रकाश फैला। देवकी के गर्भ से एक दिव्य आभा निकली और उसमें स्वयं भगवान विष्णु प्रकट हुए। चार भुजाओं में शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए हुए, मुकुट पर मोर पंख लिए हुए भगवान ने देवकी और वासुदेव को दर्शन दिए।

भगवान ने मधुर वाणी में कहा कि वे अब साधारण शिशु का रूप धारण करेंगे और वासुदेव को उन्हें गोकुल में नंद बाबा के घर पहुंचाना होगा। साथ ही वहां जन्मी नवजात कन्या को मथुरा लाना होगा।

दिव्य शक्ति का चमत्कार

जैसे ही भगवान ने शिशु रूप धारण किया, कारागार की सभी जंजीरें स्वतः खुल गईं, ताले टूट गए, दरवाजे खुल गए और सभी पहरेदार गहरी निद्रा में सो गए। यह सब भगवान की माया का प्रभाव था।


यमुना पार करने की अद्भुत कथा: जब नदी ने किया प्रभु का स्वागत

बाहर मूसलाधार वर्षा हो रही थी। वासुदेव ने नन्हे कृष्ण को एक टोकरी में लिटाया और सिर पर रखकर यमुना की ओर चल पड़े। यमुना उस समय पूरे उफान पर थी, लहरें इतनी ऊंची थीं कि पार करना असंभव लग रहा था।

यमुना का जलस्तर कम होना

लेकिन जैसे ही वासुदेव ने यमुना में कदम रखा और नदी के जल ने कृष्ण के पवित्र चरणों का स्पर्श किया, यमुना का जलस्तर तेजी से कम होने लगा। लहरें शांत हो गईं और ऐसा लगा मानो यमुना मैया स्वयं अपने कृष्ण के स्वागत में मार्ग बना रही हों।

शेषनाग द्वारा सुरक्षा

जब वर्षा और तेज हुई तो विशाल फनों वाले शेषनाग प्रकट हुए और अपने फनों से छत्र बनाकर नन्हे कृष्ण और वासुदेव को वर्षा से बचाया। यह दृश्य अत्यंत दिव्य और अलौकिक था।


गोकुल में कृष्ण का आगमन: यशोदा मैया का सौभाग्य

जब वासुदेव गोकुल में नंद बाबा के घर पहुंचे, तो वहां भी सभी सो रहे थे। उसी रात यशोदा मैया के गर्भ से एक कन्या का जन्म हुआ था, जो योगमाया थी। वासुदेव ने कृष्ण को यशोदा के पास सुला दिया और उनकी कन्या को लेकर मथुरा वापस आ गए।

प्रातःकाल जब यशोदा मैया की आंख खुली तो उन्होंने अपनी गोद में एक अप्रतिम सुंदर बालक को देखा। बड़ी-बड़ी मनमोहक आंखें, मुस्कुराते होठ और माथे पर प्राकृतिक तिलक – यह दृश्य देखकर यशोदा की आंखों में खुशी के आंसू आ गए।

नंद बाबा ने पूरे गोकुल में उत्सव की घोषणा कर दी। ढोल-नगाड़े बजे, मिठाइयां बांटी गईं और सभी ने इस शुभ अवसर को मनाया।


योगमाया का प्रकट होना: कंस को मिली चेतावनी

मथुरा में जब कंस को पता चला कि देवकी की आठवीं संतान का जन्म हुआ है, तो वह तुरंत कारागार पहुंचा। देवकी ने कांपते हुए वह कन्या कंस को सौंप दी।

कंस ने बिना समय गंवाए उस कन्या को पत्थर पर पटकने का प्रयास किया, लेकिन वह कन्या उसके हाथों से छूटकर आकाश में उड़ गई और आठ भुजाओं वाली देवी के रूप में प्रकट होकर बोली – “अरे मूर्ख कंस! तेरा काल तो गोकुल में पल रहा है। जो तेरी मृत्यु का कारण बनेगा, वह सुरक्षित है।”

कंस का चेहरा पीला पड़ गया। उसे समझ आ गया कि उसे धोखा दिया गया है। क्रोध में पागल होकर उसने आदेश दिया कि मथुरा और आसपास के क्षेत्रों में जितने भी नवजात शिशु हों, सबको मार दिया जाए।


कृष्ण की बाल लीलाएं: राक्षसों का विनाश

पूतना वध: प्रथम चमत्कार

कंस ने पूतना नामक राक्षसी को कृष्ण को मारने के लिए भेजा। पूतना पूर्व जन्म में राजा बलि की पुत्री रत्नमाला थी, जिसने भगवान वामन को क्रोधित करने पर श्राप प्राप्त किया था।

पूतना ने एक सुंदर स्त्री का रूप धारण किया और अपने स्तनों में जहर लगाकर गोकुल पहुंची। उसने नन्हे कृष्ण को दूध पिलाने का प्रयास किया, लेकिन कृष्ण ने न केवल दूध पिया बल्कि उसकी सारी जीवन शक्ति भी खींच ली। पूतना अपने असली राक्षसी रूप में आकर मर गई और श्राप से मुक्त हो गई।

कालिया नाग का दमन

यमुना नदी में कालिया नाग का आतंक था। कालिया पूर्व जन्म में वेदशिरा मुनि थे, जिन्हें घमंड के कारण नाग योनि में जन्म लेना पड़ा। जब कृष्ण की गेंद यमुना में गिर गई तो वे बिना डरे नदी में कूद गए और कालिया नाग के फनों पर नृत्य करने लगे। अंततः कालिया ने हार मानी और क्षमा मांगी।

गोवर्धन पर्वत उठाना

जब इंद्र देव के घमंड को चूर करने का समय आया, तो कृष्ण ने गोकुलवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का उपदेश दिया। क्रोधित इंद्र ने मूसलाधार वर्षा की, लेकिन कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर पूरा गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी गोकुलवासियों की रक्षा की। इंद्र को अपने अहंकार का एहसास हुआ।


राधा-कृष्ण का दिव्य प्रेम: वात्सल्य से परे

गोकुल में बरसाना से आई राधा रानी से कृष्ण की पहली मुलाकात यमुना तट पर हुई। यह प्रेम केवल शारीरिक आकर्षण नहीं था, बल्कि आत्मा का मिलन था। राधा और कृष्ण का प्रेम आज भी भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।


मथुरा वापसी: कंस का अंत

जब कृष्ण 16 वर्ष के हुए, तो अक्रूर जी उन्हें और बलराम को मथुरा ले गए। वहां कंस ने एक कुश्ती का आयोजन किया था जिसमें चाणूर और मुष्टिक नामक पहलवानों को कृष्ण को मारने का कार्य सौंपा गया था।

लेकिन कृष्ण ने दोनों पहलवानों को हराया और फिर एक झटके में कंस का वध कर दिया। कंस की मृत्यु के साथ ही देवकी और वासुदेव का श्राप समाप्त हुआ और वे कारागार से मुक्त हुए।

देवकी और यशोदा: दो मां का प्यार

जब कृष्ण ने अपनी जन्मदात्री माता देवकी के चरण स्पर्श किए तो देवकी की आंखों में आंसू थे। लेकिन कृष्ण के हृदय में यशोदा मैया के प्रति वात्सल्य भाव सदैव रहा। यशोदा ने उन्हें पाला-पोसा था, और वह प्रेम अतुलनीय था।


कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व: क्यों मनाते हैं यह पर्व?

कृष्ण जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन के महत्वपूर्ण संदेश देता है:

  1. धर्म की सदैव विजय होती है: चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हों, सत्य और धर्म की अंततः जीत होती है।
  2. माता-पिता का त्याग: देवकी-वासुदेव ने अपनी संतानों को खोया, लेकिन धर्म की रक्षा के लिए सब सहन किया।
  3. प्रेम सबसे बड़ी शक्ति है: यशोदा का वात्सल्य प्रेम और राधा का अनन्य प्रेम आज भी प्रेरणा देता है।
  4. अहंकार का विनाश: कंस, पूतना, कालिया और इंद्र – सभी का अहंकार कृष्ण ने नष्ट किया।

रोचक तथ्य जो आप नहीं जानते होंगे

तथ्य 1: कृष्ण के जन्म के समय जो आठ सिद्धियां प्रकट हुई थीं – अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व।

तथ्य 2: कृष्ण जन्माष्टमी पर व्रत रखने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

तथ्य 3: गोकुल में कृष्ण ने केवल 3 वर्ष 4 महीने बिताए, फिर वृंदावन चले गए।

तथ्य 4: कृष्ण के 16,108 रानियां थीं, लेकिन उनके हृदय में राधा का स्थान सर्वोपरि था।

तथ्य 5: कृष्ण ने महाभारत युद्ध में एक भी अस्त्र नहीं उठाया, लेकिन केवल अपनी बुद्धि से धर्म की स्थापना की।


निष्कर्ष: कृष्ण जन्म की शिक्षाएं

भगवान कृष्ण का जन्म हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, विश्वास और धर्म का पालन करना चाहिए। कारागार में जन्मे बालक ने पूरे विश्व को प्रेम, भक्ति और कर्म का पाठ पढ़ाया।

आज भी जब हम कृष्ण जन्माष्टमी मनाते हैं, तो हम केवल एक ऐतिहासिक घटना को याद नहीं करते, बल्कि उन मूल्यों को स्मरण करते हैं जो कृष्ण ने अपने जीवन से हमें दिए।

“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” – यह गीता का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: भगवान कृष्ण का जन्म किस तिथि को हुआ था?

उत्तर: भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, रोहिणी नक्षत्र में, आधी रात (लगभग 12 बजे) को हुआ था।

प्रश्न 2: कृष्ण के जन्म के समय कौन-कौन सी चमत्कारिक घटनाएं हुईं?

उत्तर: कृष्ण के जन्म के समय कारागार की जंजीरें टूट गईं, दरवाजे खुल गए, पहरेदार सो गए, यमुना का जलस्तर कम हो गया और शेषनाग ने छत्र बनाकर सुरक्षा प्रदान की।

प्रश्न 3: कंस ने देवकी की कितनी संतानों को मारा था?

उत्तर: कंस ने देवकी की पहली सात संतानों को निर्दयता से मार दिया था। आठवीं संतान भगवान कृष्ण थे, जिन्हें वासुदेव गोकुल ले गए।

प्रश्न 4: कृष्ण को गोकुल में किसने पाला?

उत्तर: गोकुल में नंद बाबा और यशोदा मैया ने कृष्ण का पालन-पोषण किया। यशोदा मैया का वात्सल्य प्रेम इतना गहरा था कि कृष्ण ने उन्हें ही अपनी माता माना।

प्रश्न 5: पूतना कौन थी और कृष्ण ने उसका वध कैसे किया?

उत्तर: पूतना एक राक्षसी थी जो पूर्व जन्म में राजा बलि की पुत्री थी। उसने विषयुक्त दूध से कृष्ण को मारने का प्रयास किया, लेकिन कृष्ण ने दूध पीते समय उसकी सारी जीवन शक्ति खींच ली और उसे श्राप से मुक्ति दिलाई।

प्रश्न 6: कृष्ण जन्माष्टमी पर व्रत कैसे रखें?

उत्तर: कृष्ण जन्माष्टमी पर पूरे दिन उपवास रखा जाता है और आधी रात को कृष्ण के जन्म के समय पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।

प्रश्न 7: यमुना नदी ने कृष्ण के लिए मार्ग कैसे बनाया?

उत्तर: जब वासुदेव कृष्ण को लेकर यमुना पार कर रहे थे, तो नदी के जल ने कृष्ण के चरणों का स्पर्श किया और स्वतः ही जलस्तर कम हो गया, जिससे वासुदेव आसानी से नदी पार कर सके।

प्रश्न 8: कृष्ण ने कंस का वध कब और कैसे किया?

उत्तर: जब कृष्ण 16 वर्ष के हुए तब मथुरा जाकर उन्होंने पहले चाणूर और मुष्टिक पहलवानों को हराया और फिर एक झटके में कंस का वध किया, जिससे मथुरा अत्याचार से मुक्त हुई।

प्रश्न 9: राधा और कृष्ण की प्रथम मुलाकात कहां हुई?

उत्तर: राधा और कृष्ण की पहली मुलाकात यमुना नदी के तट पर हुई थी। यह मुलाकात केवल भौतिक नहीं, बल्कि आत्माओं का दिव्य मिलन था।

प्रश्न 10: कृष्ण के जन्म से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर: कृष्ण के जन्म से हमें यह शिक्षा मिलती है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हों, धर्म और सत्य की अंततः विजय होती है। धैर्य, विश्वास और कर्म में निष्ठा सबसे महत्वपूर्ण है।


जय श्री कृष्ण!

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